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टेक्नोलॉजी से बदलेगा जनजातीय भारत, नालंदा यूनिवर्सिटी के VC ने दिया बड़ा विजन

टेक्नोलॉजी से बदलेगा जनजातीय भारत, नालंदा यूनिवर्सिटी के VC ने दिया बड़ा विजन

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Nalanda News: राष्ट्रीय नीति और विकास से जुड़े विमर्शों में अपनी सक्रिय भागीदारी जारी रखते हुए, नालंदा यूनिवर्सिटी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। “प्रौद्योगिकी और विज्ञान के माध्यम से जनजातीय भारत का कायाकल्प: अवसर, आकांक्षाएं और मार्ग” शीर्षक वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति डॉ. सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।

इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा, ‘नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच’ (NECTAR) और दून संस्कृति स्कूल, देहरादून के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम के दूसरे दिन, नालंदा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने “आजीविका, उद्यमिता और सामुदायिक सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी” शीर्षक वाले एक महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता की।

इस सत्र में कई जाने-माने विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. अरुण कुमार शर्मा (महानिदेशक, NECTAR), प्रो. अमे कारकरे और प्रो. अनुराग पांडे (IIT कानपुर), तथा मणिपुर के उद्यमी श्री एन. इराबांता सिंह शामिल थे। चर्चा का मुख्य केंद्र प्रौद्योगिकी-आधारित आजीविका और सामुदायिक सशक्तिकरण के विभिन्न मार्ग थे।

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अपने संबोधन में, प्रोफेसर चतुर्वेदी ने वित्तीय समावेशन के लिए एक ऐसे डिजिटल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जो इंटरनेट कनेक्टिविटी या बिजली की अनुपस्थिति में भी सुचारू रूप से कार्य कर सके। दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों तक पहुँच और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि ‘पीएम जन धन योजना’ को ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ के साथ एकीकृत करने से, इस योजना का दायरा और प्रभाव निरंतर विस्तृत होता रहेगा।

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Anjali Singh

Anjali Singh is a distinguished Dhanbad-based journalist and the Sampadak (Editor) of Mithila Top. Covering politics, society, education, and entertainment, she is celebrated for her signature writing style... masterfully translating complex current affairs into lucid, precise, and engaging narratives. Committed to factual accuracy, Anjali remains a trusted, influential, and resonant voice in regional journalism.

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