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Darbhanga AIIMS बना सियासी मुद्दा! 10 साल में बना सिर्फ गेट

Darbhanga AIIMS becomes a political issue! Only a gate built in 10 years

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Darbhanga AIIMS: बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा को लगभग एक दशक हो चुका है और सोभान को इसके केंद्र यानी निर्माण स्थल के रूप में चुने हुए लगभग छह साल हो चुके हैं। 2015 में, नरेंद्र मोदी सरकार ने पटना के बाद बिहार के दूसरे एम्स के रूप में ‘दरभंगा एम्स‘ की घोषणा की थी, जिसे मिथिला क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा वरदान माना गया था।लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति से यह साबित होता है कि दरभंगा एम्स एक चुनावी मुद्दा बन गया है। हाल ही में प्राप्त एक आरटीआई के जवाब के अनुसार, संशोधित राशि का 1% से भी कम निर्माण कार्य पर खर्च किया गया है।

Darbhanga AIIMS: RTI में हुआ बड़ा खुलासा

दरअसल, 2015 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पटना के बाद बिहार के दूसरे एम्स के रूप में दरभंगा में एम्स के निर्माण की घोषणा की थी। 2020 के विधानसभा चुनावों से पहले, मोदी सरकार ने इस परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी भी दे दी थी। फिर, 2025 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर 2024 को भूमि पूजन के साथ इसकी आधारशिला रखी। 187 एकड़ से अधिक भूमि पर बनने वाले इस संस्थान के लिए शुरू में ₹1,264 करोड़ की मंजूरी दी गई थी। हालांकि, हाल ही में प्राप्त एक आरटीआई के जवाब के अनुसार, परियोजना की संशोधित लागत अब बढ़कर ₹2,006 करोड़ हो गई है, जो मूल अनुमान से लगभग 59 प्रतिशत अधिक है।

इस बीच, विपक्षी सदस्य Darbhanga AIIMS के निर्माण में हो रही देरी पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय आरजेडी नेता प्रेमचंद उर्फ ​​भोलू यादव ने निर्माण कार्य में हो रही देरी के बारे में कहा कि भारत के प्रधानमंत्री लगभग दो साल पहले यहां शिलान्यास समारोह करने आए थे और उन्होंने किसी मंच से यहां इलाज शुरू करने के बारे में भी बात की थी। लेकिन उनकी बातों या विचारों को समझना मुश्किल है क्योंकि इस देश में, दरभंगा एम्स की मंजूरी के बाद, अन्य राज्यों में जहां इसकी घोषणा की गई थी, वहां एम्स का निर्माण हो चुका है और वहां इलाज भी उपलब्ध कराया जा रहा है, और यहां देखिए, एक दशक में केवल एक ही गेट का निर्माण हुआ है।

वहीं उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस स्थल पर दरभंगा एम्स बन रहा है उस स्थल का चयन उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव ने जगह चयन किया था चूंकि शुरू में जब इसकी मंजूरी मिली तो बिहार में एनडीए की सरकार थी तो दरभंगा के डीएमसीएच कैंपस में निर्माण कि मंजूरी मिली थी कुछ काम भी हो गया लेकिन फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भाजपा से मोह भंग हो गया और महागठबंधन के साथ सरकार बना लेकिन दरभंगा एम्स को लेकर तरह तरह की सवाल उठने लगे फिर नीतीश कुमार ने डीएमसीएच के निरीक्षण के दौरान यह घोषणा की यहाँ पर 1800 बेड का नए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण किया जायेगा और दरभंगा एम्स का निर्माण एन एच 27 के बगल में सोभन में किया जायेगा .

दरभंगा एम्स की धीमी रफ्तार पर सवाल

वहीं भोलू यादव ने बताया कि आरटीआई के माध्यम से खुलासा हुआ है कि यह गेट सिर्फ 19 करोड़ की लागत से बनाई गई है इस एम्स पर 2029 का चुनाव लड़ेगे अभी तक तीन चुनाव लड़ लिये है वैसे इस प्रगति से काम हो रहा है 2029 में काम पूरा नहीं हो पायेगा

वहीं दरभंगा एम्स के निर्माण कार्य पर पूछे गये सवाल पर राज्यसभा सांसद धर्मशाली गुप्ता ने बताई की हमारे दरभंगा में जो दूसरा एम्स बन रहा है कार्य काफी प्रगति पर है क्योंकि लो लैंड था और आज वहाँ पर मिट्टी भराई गेट और बाउंड्री का काम चल रहा है हाल के दिनों में हमारी सरकार भी यहाँ आई थी और हमारे स्वास्थ्य मंत्री भी इसकी गहन समीक्षा कर रहें है हमारा विश्वास है कि हमारे एनडीए की सरकार में दरभंगा एम्स जल्द बनकर तैयार हो जायेगा

वहीं हाल के दिनों में आरटीआई के माध्यम से मिली जवाब के अनुसार परियोजना के प्रमुख बुनियादी ढांचागत हिस्सों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. अस्पताल भवन, शैक्षणिक ब्लॉक, आवासीय परिसर और अन्य प्रमुख सुविधाओं की स्थिति को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में निर्माण कार्य कर रहें कंपनी एचएससीसी ने कहा कि “उक्त कार्य मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किए जाने हैं.

दिये गये जवाब साफ साफ इशारा कर रहा है कि शिलान्यास समारोह होना और इस परियोजना का सार्वजनिक रूप से बार-बार जिक्र किए जाने के बावजूद, मुख्य सिविल निर्माण कार्यों को अभी भी मंजूरियों के कतार में है.

2029 तक तैयार होगा Darbhanga AIIMS?

एचएससीसी ने जानकारी दी है कि एम्स दरभंगा के जुलाई 2029 में चालू होने की संभावना है. आरटीआई के जवाब के अनुसार, अब तक हुए खर्च में वित्तीय वर्ष (FY) 2024-25 के दौरान 21.33 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 19.18 करोड़ रुपये शामिल हैं. कुल मिलाकर, अब तक लगभग 19.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो कि 2,006 करोड़ रुपये की संशोधित परियोजना लागत का 1 प्रतिशत से भी कम है.

प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी अभी भी लंबित होने और संशोधित लागत का 1% से भी कम खर्च होने के कारण, जुलाई 2029 की समय सीमा पर गंभीर सवाल उठना तय है, खासकर जब इस बात पर संदेह बढ़ रहा है कि क्या यह महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजना वास्तव में अगले तीन वर्षों के भीतर चालू हो पाएगी।

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Bhumika

Bhumika Kumari is a Jharkhand-based journalist from Dhanbad, specializing in politics, entertainment, education, society, and current affairs. Known for her clear, accurate, and accessible writing style, she effectively bridges complex issues for the public. She also serves as a key content writer for the digital platform Mithila Top.

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